डीजीक्यूए में क्लर्क भर्ती घोटाला फंसे पांच कर्मचारी बर्खास्त, पढ़ें क्या है पूरा मामला
प्रयागभारत, कानपुर: रक्षा मंत्रालय का संस्थान गुणवत्ता आश्वासन महानिदेशालय यानी डीजीक्यूए, जीटी रोड में हुए क्लर्क भर्ती घोटाला में फंसे पांच कर्मचारियों को बर्खास्त कर दिया गया है। आरोपित केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण, इलाहाबाद से मिले स्टे की अवधि खत्म होने के बाद भी तीन साल से अफसरों को गुमराह कर सेवाएं दे रहे थे।
शिकायतकर्ता स्नेहा गुप्ता की ओर से आरटीआइ में मांगी गई जानकारी में पता चला कि पांच क्लर्क आरती गुप्ता, उत्कर्ष श्रीवास्तव, प्रतिभा द्विवेदी, अर्पित सिंह, रविकांत पांडेय के पास 28 जुलाई 2021 तक ही स्टे वैध था। यह प्रकरण संज्ञान में आने के बाद उच्चाधिकारियों ने पांच आरोपित क्लर्क को बर्खास्त कर दिया है। डीजीक्यूए के वरिष्ठ अधिकारी ने बर्खास्त किए जाने की कार्यवाही की पुष्टि की है।
रक्षा प्रतिष्ठान डीजीक्यूए में क्लर्कों की नियुक्ति का मामला वर्ष 2016 का है। भर्ती घोटाले में जमकर रुपयों का लेनदेन हुआ था। एक अफसर के मुताबिक, सीबीआइ के हाथ एक मोबाइल की काल रिकार्डिंग हाथ लगी थी जिसमें भर्ती घोटाले से संबंधित लेनदेन व नेता के साथ हुए गठजोड़ की बातें की गई हैं। पूछताछ के दौरान सीबीआइ ने एक कर्मचारी का लैपटाप व मोबाइल भी जब्त किया था।
बताते हैं, इस भर्ती में एक आवेदक के आवेदन फार्म को निरस्त कर दिया गया था, लेकिन एक अधिकारी के हस्तक्षेप के बाद उसे स्वीकृत किया गया। आरोप है कि मानकों का उल्लंघन कर पूर्व अधिकारियों व कर्मचारियों के रिश्तेदारों का चयन किया गया। छह क्लर्कों की नियुक्ति के बाद एक महिला अभ्यर्थी ने रक्षा मंत्रालय व प्रधानमंत्री कार्यालय में नियुक्ति में धांधली की शिकायत की थी।
उसका कहना था कि उसने भी नौकरी के लिए लिखित परीक्षा दी थी, जिसमें उसके अंक अच्छे थे। कम अंक प्राप्त करने वाले अभ्यर्थियों की उत्तर पुस्तिका में छेड़छाड़ करके अंक बढ़ाए गए। उसकी शिकायत पर रक्षा मंत्रालय ने जांच के आदेश दिए थे। इसी पर संज्ञान लेकर अब बर्खास्तगी की कार्यवाही की गई है।
