Uttarakhand

होलाष्टक प्रारंभ, आज से आठ दिन वर्जित रहेंगे शुभ कार्य; दूर करें असमंजस और इस दिन खेलें होली

Summary

Spread the love

Spread the love प्रयाग भारत, बाजपुर : होली का पर्व भी शुरू हो गया है। इस वर्ष आज रविवार से 24 मार्च तक होलाष्टक होगा। इस प्रकार 25 मार्च को होली मनाई जाएगी। ज्योतिष की दृष्टि से इस अवधि में शुभ कार्य (विवाह, नामकरण संस्कार, […]

Spread the love

 प्रयाग भारत, बाजपुर : होली का पर्व भी शुरू हो गया है। इस वर्ष आज रविवार से 24 मार्च तक होलाष्टक होगा। इस प्रकार 25 मार्च को होली मनाई जाएगी। ज्योतिष की दृष्टि से इस अवधि में शुभ कार्य (विवाह, नामकरण संस्कार, विद्यारंभ, गृह प्रवेश, नव निर्माण आदि) वर्जित होते हैं।

समस्त शुभ कार्य वर्जित

पं. शिव कुमार शास्त्री ने बताया कि इस दौरान समस्त शुभ कार्य वर्जित माने जाते हैं। एक कथा के अनुसार सतयुग में हिरण्य कश्यप ने घोर तप कर ब्रह्मा जी से वरदान पा लिया। वरदान के अहंकार में डूबे हिरण्य कश्यप ने देवताओं सहित सबको हरा दिया।

इधर भगवान विष्णु ने अपने भक्त के उद्धार के लिए अपना अंश उसकी पत्नी कयाधू के गर्भ में पहले ही स्थापित कर दिया था, जो प्रह्लाद के रूप में पैदा हुए। प्रह्लाद का विष्णु भक्त होना पिता हिरण्य कश्यप को अच्छा नहीं लगता था। उसे भक्ति से रोकने के लिए फाल्गुन शुक्ल पक्ष की अष्टमी को बंदी बना लिया। जान से मारने के लिए यातनाएं दीं पर प्रह्लाद विष्णु कृपा से हर बार बच गए। इसी प्रकार सात दिन बीत गए।

आठवें दिन अपने भाई हिरण्य कश्यप की परेशानी देख उसकी बहन होलिका (जिसे ब्रह्मा जी ने अग्नि से न जलने का वरदान दिया था) प्रह्लाद को अपनी गोद में बैठाकर अग्नि में प्रवेश कर गई पर हुआ उल्टा। देवकृपा से वह स्वयं अग्नि में जलकर भष्म हो गई और प्रह्लाद को कुछ नहीं हुआ।

नृसिंह भगवान ने हिरण्य कश्यप का वध किया, तभी से भक्ति पर आए इस संकट के कारण इन आठ दिनों को होलाष्टक के रूप में मनाया जाता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *