भवाली-नैनीताल मोटर मार्ग के हिस्से में दरार , उत्तराखंड में बारिश बनी आफत
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Spread the loveप्रयागभारत , नैनीताल ; शहर में मानसूनी वर्षा आफत बनकर बरस रही है। बीते दिनों से हो रही वर्षा के चलते भवाली-नैनीताल मोटर मार्ग में भारी धंसाव हुआ है। कैलाखान के समीप सड़क का करीब 70 मीटर हिस्सा […]
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प्रयागभारत , नैनीताल ; शहर में मानसूनी वर्षा आफत बनकर बरस रही है। बीते दिनों से हो रही वर्षा के चलते भवाली-नैनीताल मोटर मार्ग में भारी धंसाव हुआ है। कैलाखान के समीप सड़क का करीब 70 मीटर हिस्सा धंस गया है। बड़ी-बड़ी दरारें उभरने से सड़क के खाई में समाने का संकट गहरा गया है। ऐसे में सड़क टूटी तो नैनीताल-भवाली मार्ग पर वाहनों की आवाजाही बाधित हो जाएगी।
वहीं, ट्रीटमेंट के नाम पर लोनिवि की ओर से दरार वाले हिस्से में वाहनों की रोकथाम के लिए पत्थर लगा दिए गए हैं। बलियानाला पहाड़ी पर वर्षों से भूस्खलन हो रहा है। पहाड़ी से पानी का लगातार रिसाव होने से तलहटी व कैलाखान की ओर की पहाड़ी पर भी भू-कटाव होने लगा है। इस वर्ष पहाड़ी पर भूस्खलन रोकथाम कार्य चलने के कारण कुछ राहत है, मगर तलहटी पर पानी का रिसाव बढ़ने से कटाव की स्थिति बनी हुई है। जिस कारण कैलाखान की ओर की पहाड़ी पर भी धंसाव होने लगा है।
सड़क का करीब 70 मीटर लंबा हिस्सा चार इंच तक नीचे बैठ गया है। ऐसे में सड़क पर बड़ी दरार उभर आई है। सड़क को समय रहते उपचार नहीं मिला तो पूरी तरह टूटने से वाहनों के संचालन का संकट भी गहरा सकता है।
वर्षों से नहीं मिल सका स्थायी उपचार
कैलाखान क्षेत्र में भू-धंसाव का अहम कारण बलियानाला पहाड़ी व उसकी तलहटी पर हो रहा भूस्खलन है। तलहटी पर भू-कटाव होने से कैलाखान की ओर की पहाड़ी में भी धंसाव हो रहा है। जिस कारण सड़क के इस हिस्से में हर वर्ष धसांव की परेशानी बनी रहती है। मगर वर्षों गुजरने के बाद भी सड़क और पहाड़ी को स्थायी उपचार नहीं मिल सका।
हर साल धंसे हुए हिस्से में अस्थायी तौर पर मलबा भरकर ऊपर डामरीकरण कर दिया जाता है। बीते वर्ष सितंबर माह में ही लोनिवि ने डामरीकरण कर इस हिस्से को दुरुस्त किया था, मगर मानसून की पहली वर्षा के बाद फिर सड़क पर धंसाव होने लगा है।
कैलाखान पहाड़ी पर भूस्खलन से मची थी तबाही
भवाली मोटर मार्ग पर जिस स्थान पर दरारें उभर आई है, उसकी पहाड़ी पर हुआ भूस्खलन पूर्व में भारी तबाही मचा चुका है। 1898 में कैलाखान पहाड़ी पर भारी भूस्खलन हुआ था। जिसके मलबे ने बलियानाले के पानी को रोक दिया था। जिससे क्षेत्र में तीन बड़ी-बड़ी झीले बन गई थी। पानी की निकासी नहीं होने के बाद इन तीनों झीलों के टूटने से वीरभट्टी क्षेत्र में भारी तबाही मची थी। जिसमें शराब की फैक्ट्री बह गई थी। इस घटना में 27 हिंदुस्तानियों व एक अंग्रेज की मौत भी हो गई थी।
दो साल पहले टूटा संपर्क, नहीं लिया सबक
भवाली-नैनीताल मोटर मार्ग पर दो साल पूर्व पाइंस के समीप भारी भूस्खलन हुआ था। जिसमें पहाड़ी के साथ सड़क का बड़ा हिस्सा ध्वस्त हो गया था। जिस कारण एक माह से भी अधिक समय तक मार्ग में वाहनों की आवाजाही बाधित रही। अब कैलाखान क्षेत्र में सड़क पर उभरी बड़ी दरारें बड़े खतरे की ओर इशारा कर रही हैं।
पूर्व वर्षों में पहाड़ी की रोकथाम को वायरक्रेट्स व सुरक्षा दीवार लगाई गई थी, मगर बलियानाला में भूस्खलन के कारण सब टूट गईं। तलहटी में भूस्खलन होने के कारण पूरी पहाड़ी में धंसाव हो रहा है। जिसके स्थायी उपचार पर विभागीय स्तर पर विचार किया जा रहा है। रत्नेश कुमार सक्सेना, अधिशासी अभियंता लोनिवि नैनीताल।
