Uttarakhand

गैस संकट के बीच अब कोयला भी महंगा, होटल-रेस्टोरेंट कारोबार पर दोहरी मार

Summary

Spread the love

Spread the loveप्रयागभारत, हल्द्वानी : कमर्शियल एलपीजी सिलेंडरों की किल्लत के बीच होटल, रेस्टोरेंट और मिठाई कारोबारियों ने विकल्प के तौर पर कोयले का इस्तेमाल बढ़ा दिया है। अधिकांश व्यंजन अब कोयले की भट्टी में तैयार किए जा रहे हैं, […]

Spread the love

प्रयागभारत, हल्द्वानी : कमर्शियल एलपीजी सिलेंडरों की किल्लत के बीच होटल, रेस्टोरेंट और मिठाई कारोबारियों ने विकल्प के तौर पर कोयले का इस्तेमाल बढ़ा दिया है। अधिकांश व्यंजन अब कोयले की भट्टी में तैयार किए जा रहे हैं, लेकिन कोयले की बढ़ती कीमतों ने कारोबारियों की परेशानी और बढ़ा दी है। कई कारोबारियों ने व्यंजनों की कीमतों में भी वृद्धि कर दी है।

व्यवसायियों के अनुसार लकड़ी के कोयले की कीमत 35–40 रुपये प्रति किलो से बढ़कर 60–70 रुपये तक पहुंच गई है। वहीं, पक्का कोयला 15–20 रुपये से बढ़कर 25–30 रुपये प्रति किलो हो गया है। इसके साथ ही कोयले की भट्टी में बार-बार पंखा चलाने से बिजली की खपत भी बढ़ रही है, जिससे कुल खर्च में इजाफा हो रहा है। कारोबारियों का कहना है कि बाजार में इन दिनों कोयले की गुणवत्ता भी खराब मिल रही है। जहां पहले 5 किलो कोयले में काम चल जाता था, वहीं अब डेढ़ से दोगुना अधिक कोयला खर्च करना पड़ रहा है।
उन्होंने आशंका जताई कि यदि जल्द गैस आपूर्ति सामान्य नहीं हुई तो आने वाले दिनों में स्थिति और गंभीर हो सकती है।

एक दिन में 200 किलो तक कोयले की खपत
होटल और रेस्टोरेंट में अब प्रतिदिन करीब 200 किलो कोयले की खपत हो रही है, जो पहले की तुलना में कई गुना अधिक है। पहले कोयले का इस्तेमाल सीमित कार्यों के लिए होता था, लेकिन अब अधिकांश खाद्य सामग्री इसी से तैयार की जा रही है। कमर्शियल गैस सिलेंडर नहीं मिलने से कई कारोबारियों ने हीटर का उपयोग भी शुरू कर दिया है, जिससे बिजली खर्च में और बढ़ोतरी हो रही है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *