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मासूम बच्चे की बीमारी को बनाया गया “धंधा”, नर्स नहीं, एक धोखेबाज़ थी “दामिनी”

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प्रयाग भारत, दुर्ग : छत्तीसगढ़ के धमधा में मासूम बच्चे की बीमारी को बनाया गया “धंधा”, और एक मां की ममता को छलनी कर दिया गया ठगी के ताने-बाने ने। मगर थाना धमधा की सतर्क पुलिस ने इस शातिर महिला ठग को बख्शा नहीं — मामला दर्ज होते ही सिर्फ 24 घंटे में आरोपिया को सलाखों के पीछे पहुंचा दिया।

 नर्स नहीं, एक धोखेबाज़ थी “दामिनी”

ग्राम तुमाकला की असनी बाई निर्मलकर के लिए यह हादसा किसी बुरे सपने से कम नहीं था। उनका 13 वर्षीय बेटा विनय किडनी की गंभीर बीमारी से जूझ रहा है। इसी दौरान दिसंबर 2024 में उनके जीवन में दाखिल होती है — “दामिनी मानिकपुरी”, जिसने खुद को AIIMS की नर्स बताकर मां के दिल में उम्मीद का बीज बो दिया।

उसने कहा: “मैं एम्स में हूं, तुम्हारे बेटे का ट्रांसप्लांट करवा दूंगी, बस थोड़ा खर्चा लगेगा…” और यहीं से शुरू हुआ ममता के दोहन का एक सुनियोजित खेल।

एक-एक कर उड़ाए ₹1.20 लाख

विश्वास के जाल में फंसी मां ने जो भी था, दे दिया — कभी नगद, कभी ऑनलाइन:

₹10,000 पहली किस्त में
₹75,000 नगद में अलग-अलग समय पर
₹15,000 और ₹20,000 PhonePe से
कुल रकम बनी ₹1,20,000 — पर  इलाज नहीं, सिर्फ बहाने मिले।

जब पीड़िता ने अपने पैसे वापस मांगे, तो आरोपिया ने 19 जून 2025 को ₹1.20 लाख का चेक थमाया — जो बाउंस हो गया। एक और मौका दिया गया — 1 सितंबर को दूसरा चेक दिया गया लेकिन यह भी बाउंस।

अब मां को समझ आ चुका था कि उसे न सिर्फ इलाज का झांसा दिया गया, बल्कि उसकी ममता को मोहरा बनाकर आर्थिक शोषण भी किया गया।

पीड़िता की लिखित शिकायत मिलते ही थाना धमधा ने तत्काल धारा 420 सहित अन्य गंभीर धाराओं में केस दर्ज कर जांच शुरू की। तकनीकी साक्ष्य, मोबाइल लोकेशन और वित्तीय ट्रेसिंग के आधार पर 5 सितंबर 2025 को दामिनी मानिकपुरी गिरफ्तार उसी दिन न्यायालय में प्रस्तुत कर न्यायिक रिमांड पर भेजा गया।

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