Uttarakhand

13 किलोमीटर लंबी टनल, काम कर रहे थे मजदूर, अचानक आपस में टकरा गईं दो लोको ट्रेन

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प्रयाग भारत, उत्तराखंड : चमोली जिले में देर रात एक बड़ा हादसा हो गया। टीएचडीसी द्वारा संचालित विष्णुगाड-पीपलकोटी जलविद्युत परियोजना के निर्माण कार्य के दौरान सुरंग के भीतर दो लोको ट्रेनों की आमने-सामने टक्कर हो गई। हादसा इतना भीषण था कि सुरंग में काम कर रहे दर्जनों अधिकारी, कर्मचारी और मजदूर इसकी चपेट में आ गए। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार इस दुर्घटना में करीब 86 से अधिक लोग घायल हुए हैं, जिन्हें तत्काल अस्पतालों में भर्ती कराया गया। बता दे कि यह हादसा रात करीब साढ़े नौ बजे हुआ। अलकनंदा नदी पर बन रही 444 मेगावाट क्षमता की इस जलविद्युत परियोजना में 13 किलोमीटर लंबी सुरंग का निर्माण कार्य चल रहा है। हादसे के समय सुरंग के भीतर 100 से अधिक अधिकारी, कर्मचारी और मजदूर मौजूद थे।

टनल बोरिंग मशीन (टीबीएम) के माध्यम से खुदाई का कार्य किया जा रहा था और सामग्री ढोने के लिए लोको ट्रेनों का इस्तेमाल किया जा रहा था। इसी दौरान सुरंग के अंदर तेज गति से चल रही दो लोको ट्रेनें आपस में टकरा गईं। टक्कर के बाद सुरंग में अफरा-तफरी मच गई। कई मजदूर और कर्मचारी मशीनों की चपेट में आकर घायल हो गए। हादसे की सूचना मिलते ही परियोजना प्रबंधन और प्रशासन में हड़कंप मच गया। सुरंग के भीतर फंसे लोगों को बाहर निकालने के लिए तुरंत राहत और बचाव कार्य शुरू किया गया। घायलों को प्राथमिक उपचार देने के बाद जोशीमठ और आसपास के अस्पतालों में भेजा गया है। कुछ घायलों की हालत गंभीर बताई जा रही है, जबकि कई को मामूली चोटें आई हैं। एंबुलेंस और मेडिकल टीमों को देर रात ही मौके पर बुलाया गया। सुरक्षा कारणों को देखते हुए सुरंग के अंदर चल रहे सभी निर्माण कार्यों को फिलहाल रोक दिया गया है।

हादसे की सूचना मिलते ही जिला प्रशासन तुरंत हरकत में आया। जिलाधिकारी गौरव कुमार और पुलिस अधीक्षक सुरजीत सिंह पंवार देर रात जिला अस्पताल गोपेश्वर पहुंचे, जहां उन्होंने भर्ती घायलों का हालचाल जाना और चिकित्सकों को बेहतर और त्वरित उपचार सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। प्रशासन की ओर से सभी अस्पतालों को अलर्ट पर रखा गया, ताकि घायलों को किसी भी तरह की परेशानी न हो। जिलाधिकारी ने जानकारी देते हुए कहा कि प्रारंभिक रिपोर्ट के अनुसार करीब 60 लोग इस दुर्घटना में घायल हुए हैं। इनमें से 42 घायल मजदूरों और कर्मचारियों का इलाज जिला अस्पताल गोपेश्वर में चल रहा है, जबकि 17 घायलों को विवेकानंद अस्पताल पीपलकोटी में भर्ती कराया गया है। शेष लोगों को प्राथमिक उपचार के बाद छुट्टी दे दी गई है। राहत की बात यह है कि सभी घायलों की हालत फिलहाल स्थिर बताई जा रही है और किसी के भी जान को खतरा नहीं है।

घटना के बाद परियोजना प्रबंधन ने हादसे की जांच के आदेश दे दिए हैं। यह पता लगाया जा रहा है कि लोको ट्रेनों की टक्कर तकनीकी खराबी के कारण हुई या फिर मानवीय लापरवाही इसकी वजह रही। वहीं प्रशासन भी पूरे मामले पर नजर बनाए हुए है और घायलों को हर संभव चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं। इस हादसे ने एक बार फिर बड़े जलविद्युत परियोजनाओं में काम कर रहे मजदूरों और कर्मचारियों की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। सुरंग के भीतर भारी मशीनों के साथ काम करना पहले से ही जोखिम भरा होता है, ऐसे में सुरक्षा मानकों की अनदेखी गंभीर हादसों को जन्म दे सकती है। फिलहाल पूरे क्षेत्र में दहशत का माहौल है और जांच रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है।

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