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सोनिया गांधी के वोटर लिस्ट मामले में फिर सुनवाई, BJP प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने उठाए सवाल

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प्रयाग भारत, नई दिल्ली : कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी के 1980 के मतदाता सूची में नाम शामिल होने से जुड़े मामले में दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट के आदेश के बाद विवाद फिर चर्चा में आ गया है। कोर्ट ने मजिस्ट्रेट कोर्ट के उस पुराने आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें सोनिया गांधी के खिलाफ FIR दर्ज करने की मांग पर आगे जांच का निर्देश देने से इनकार किया गया था। मामले को अब नए सिरे से सुनवाई के लिए मजिस्ट्रेट कोर्ट में भेजा गया है।

इसी घटनाक्रम के बाद BJP के राष्ट्रीय प्रवक्ता और राष्ट्रीय मीडिया सह-संयोजक प्रदीप भंडारी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कांग्रेस और सोनिया गांधी पर निशाना साधा। उन्होंने सोनिया गांधी के ‘वोट चोरी’ के आरोपों का जिक्र करते हुए ‘लोकतंत्र की चोरी’ का आरोप लगाया। यह भंडारी का राजनीतिक बयान है, जिसे कोर्ट के निष्कर्ष के रूप में नहीं देखा जा सकता।

1980 की मतदाता सूची को लेकर क्या है आरोप ?

मामले में दायर शिकायत में आरोप लगाया गया है कि सोनिया गांधी का नाम 1980 में नई दिल्ली संसदीय क्षेत्र की मतदाता सूची में शामिल था, जबकि शिकायतकर्ता के अनुसार उन्हें भारतीय नागरिकता 30 अप्रैल 1983 को मिली थी।

शिकायत में यह भी सवाल उठाया गया है कि नागरिकता हासिल करने से पहले उनका नाम मतदाता सूची में किस आधार पर दर्ज किया गया और इसके लिए किन दस्तावेजों का इस्तेमाल हुआ। शिकायत में कथित फर्जीवाड़े की जांच और FIR दर्ज करने की मांग की गई थी। इन आरोपों की अभी न्यायिक जांच के बाद पुष्टि होना बाकी है।

प्रदीप भंडारी ने क्या कहा ?

BJP प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने कहा कि भारत में मतदान के अधिकार के लिए नागरिकता एक बुनियादी आवश्यकता है। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि 1980 में सोनिया गांधी भारतीय नागरिक नहीं थीं, तो उस समय उनका नाम मतदाता सूची में किस आधार पर शामिल हुआ।

भंडारी ने यह भी सवाल उठाया कि क्या इस प्रक्रिया में किसी तरह के दस्तावेजी फर्जीवाड़े का इस्तेमाल हुआ था। हालांकि, ये सवाल शिकायत में लगाए गए आरोपों और BJP प्रवक्ता के बयानों पर आधारित हैं; कोर्ट ने अभी इन आरोपों को सही ठहराने वाला कोई अंतिम निष्कर्ष नहीं दिया है।

कोर्ट ने पुराने आदेश पर क्या कहा ?

राउज एवेन्यू कोर्ट के विशेष न्यायाधीश विशाल गोगने ने मजिस्ट्रेट कोर्ट के पुराने आदेश को रद्द करते हुए मामले पर नए सिरे से विचार करने का निर्देश दिया। रिपोर्टों के मुताबिक, कोर्ट ने माना कि पुराने आदेश में पर्याप्त कारण स्पष्ट नहीं किए गए थे और पुलिस अधिकारी की दलीलें सुनने तथा स्टेटस रिपोर्ट लेने की प्रक्रिया भी पूरी नहीं की गई थी।

कोर्ट ने मामले को वापस मजिस्ट्रेट कोर्ट भेजते हुए निर्देश दिया कि शिकायत पर दोबारा विचार किया जाए और एक कारणयुक्त आदेश पारित किया जाए।

1980, 1982 और 1983 की वोटर लिस्ट का मुद्दा

शिकायत में दावा किया गया है कि सोनिया गांधी का नाम 1980 में मतदाता सूची में दर्ज था। इसके बाद कथित तौर पर 1982 में नाम हटाया गया और 1983 में दोबारा शामिल किया गया।

मामले में यह भी दावा किया गया है कि सोनिया गांधी को भारतीय नागरिकता अप्रैल 1983 में मिली थी। इसी समय-क्रम को लेकर शिकायतकर्ता ने सवाल उठाते हुए जांच की मांग की है।

29 सितंबर को होगी अगली सुनवाई

कोर्ट के निर्देश के बाद मामला अब फिर मजिस्ट्रेट कोर्ट में पहुंचेगा। पुलिस से स्टेटस रिपोर्ट मांगी जाएगी और संबंधित पक्षों को सुनने के बाद मामले पर नया और तर्कपूर्ण आदेश पारित किया जाएगा।

इस मामले की अगली सुनवाई 29 सितंबर 2026 को निर्धारित की गई है। फिलहाल कोर्ट के आदेश का अर्थ यह नहीं है कि सोनिया गांधी के खिलाफ लगाए गए आरोप साबित हो गए हैं; अदालत ने सिर्फ पुराने आदेश को रद्द कर मामले पर नए सिरे से विचार करने का रास्ता खोला है।

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