Uttara Pradesh

बिना चीर फाड़ शव का पोस्टमार्टम…, क्या है वर्चुअल ऑटोप्सी, जिसे यूपी के अस्पताल में शुरू करने की तैयारी

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प्रयागभारत, नोएडा: सेक्टर-39 जिला अस्पताल में वर्चुअल ऑटोप्सी यानी बिना चीर फाड़ के शव का पोस्टमार्टम शुरु करने की तैयारी है। एमआरआई मशीन लगने के बाद इस दिशा काम आग बढ़ेगा। नोएडा का अस्पताल प्रदेश का पहला ऐसा जिला अस्पताल होगा, जहां वर्चुअल ऑटोप्सी की सुविधा मिलेगी।

सड़क हादसे, संदिग्ध मौत, हत्या, आत्महत्या, ऊंचाई से गिरने से, फैक्ट्री, कंपनी, कंस्ट्रक्शन साइट समेत आदि मामले में मौत का राज जानने के लिए स्थानीय पुलिस की ओर से शव को कब्जे में लेकर पंचायतनामा भरने के बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए सेक्टर-39 स्थित पोस्टमार्टम हाउस किया जाता है, जहां अभी मैनुअल ही पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूर्ण की जाती है।

पोस्टमार्टम कराने से कतराते परिजन

डॉक्टर पोस्टमार्टम हाउस में कार्यरत कर्मियों की मदद से पोस्टमार्टम करते हैं। अभी पोस्टमार्टम के दौरान जरूरी औजार की कमी भी रहती है। वहीं कई बार स्वजन पोस्टमार्टम के दौरान मृत शरीर की चीर-फाड़ प्रक्रिया से बचने के लिए पोस्टमार्टम कराने से मना करते हैं, लेकिन पुलिस की ओर से कानूनी कार्रवाई से बचने के लिए पोस्टमार्टम की प्रक्रिया को पूर्ण किया जाता है।

ऐसे में अगर जिला अस्पताल में वर्चुअल ऑटोप्सी शुरु होती है, तो मृतक के स्वजन को सहूलियत होगी। वहीं पोस्टमार्टम रिपोर्ट भी सही प्राप्त हो सके। अभी जिले में प्रतिदिन पांच से 10 शवों का पोस्टमार्टम होता है। जिला अस्पताल की मुख्य चिकित्सा अधीक्षक (सीएमएस) डॉ. रेनू अग्रवाल का कहना है कि बुधवार को प्रमुख सचिव स्वास्थ्य पार्थ सारथी सेन शर्मा ने अस्पताल का निरीक्षण किया था।

उन्होंने अस्पताल में सीटी स्कैन समेत अन्य जरूरी सुविधाओं को परखा था। निरीक्षण के दौरान कोरोना काल में टाटा कंपनी की ओर से सीएसआर के तहत लगाई गई सीटी स्कैन मशीन के संचालन के लिए निर्देशित किया था। वहीं अस्पताल में एमआरआई मशीन को लगाने के लिए निर्देश दिए थे। अभी अस्पताल में एमआरआई जांच सुविधा नहीं है। मरीजों को जांच के लिए जिम्स भेजा जाता है।

अस्पताल में पीपीई मॉडल पर एमआरआई मशीन लगाई जानी है। एमआरआइ मशीन लगने के बाद फारेंसिक एक्सपर्ट की मदद से वर्चुअल आटोप्सी भी शुरु करने के लिए कहा है। अभी अस्पताल में फारेंसिक एक्सपर्ट के रूप डॉ. ऋषभ कुमार है। एमआरआइ मशीन लगने के बाद वर्चुअल आटोप्सी शुरु की जाएगी। इसके लिए फारेंसिक डॉक्टर को जरूरी प्रशिक्षण भी दिया जाएगा। शासन स्तर से सभी डाक्टरों के प्रशिक्षण की व्यवस्था की जाएगी।

क्या है वर्चुअल आटोप्सी

वर्चुअल ऑटोप्सी में पोस्टमार्टम करने के लिए शरीर का चीर फाड़ नहीं करते। इसमें एमआरआई, सीटी स्कैन, डिजिटल एक्स-रे मशीनों के द्वारा शव की जांच की जाती है। मशीनों में लगे डिजिटल एक्सरे तकनीक के जरिये मौत होने का समय और कारण का पता लगाया जाता है। इसमें एमआरआई मशीन में शव को अंदर डाला जाता है, जिसके बाद डाक्टर उसकी स्टडी कर मौत के कारणों और शरीर पर लगी चोट और निशान आदि का अध्ययन करते हैं। हत्या के मामलों की जांच में पोस्टमार्टम अहम हिस्सा होता है। वर्चुअल ऑटोप्सी की प्रक्रिया करीब आधा घंटे में पूरी हो जाती है।

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