Uttarakhand

Gairsain में विधानसभा सत्र के पहले दिन बवाल, यूकेडी-कांग्रेस ने तोड़े बैरियर; वाटर कैनन से प्रदर्शनकारियों को रोका

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प्रयाग भारत , गैरसैंण : उत्तराखंड की ग्रीष्मकालीन राजधानी भराड़ीसैंण में विधानसभा सत्र के पहले दिन स्थायी राजधानी समेत कई बुनियादी मुद्दों को लेकर राजनीतिक माहौल गरमा गया। गैरसैंण को स्थायी राजधानी घोषित करने, बदहाल स्वास्थ्य सेवाओं, शिक्षा व्यवस्था में सुधार और जर्जर सड़कों जैसे मुद्दों पर उत्तराखंड क्रांति दल (यूकेडी) और कांग्रेस ने सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया। इस दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच कई स्थानों पर तीखी झड़प हुई। प्रदर्शनकारियों ने सुरक्षा बैरियर तोड़े, जबकि पुलिस ने उन्हें रोकने के लिए वाटर कैनन का इस्तेमाल किया। पुलिस ने बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेकर अस्थायी जेल भेजा।

विधानसभा सत्र के पहले दिन सुबह से ही पांडुवाखाल, मेहलचौरी, कालीमाटी और दिवालीखाल बैरियर पर तनावपूर्ण स्थिति बनी रही। प्रदर्शनकारियों को विधानसभा की ओर बढ़ने से रोकने के लिए प्रशासन ने कई स्तरों पर सुरक्षा व्यवस्था की थी। हालांकि, विरोध कर रहे संगठनों के कार्यकर्ता अलग-अलग रास्तों से आगे बढ़ते रहे। इस दौरान आम लोगों को भी आवागमन में परेशानी का सामना करना पड़ा।

मेहलचौरी में गेट उखाड़कर रामगंगा नदी में फेंका

कुमाऊं की ओर से आ रहे कांग्रेस, उत्तराखंड क्रांति दल और प्रदेश प्रधान संगठन के कार्यकर्ताओं की सुबह करीब आठ बजे से पांडुवाखाल और मेहलचौरी बैरियर पर पुलिस के साथ बहस और धक्का-मुक्की शुरू हो गई। विरोध बढ़ने के बीच यूकेडी कार्यकर्ताओं ने मेहलचौरी पुल पर लगा लोहे का गेट उखाड़कर रामगंगा नदी में फेंक दिया।

वहीं, कालीमाटी बैरियर पर कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष करन माहरा, गणेश गोदियाल और मुकेश नेगी के नेतृत्व में कार्यकर्ता धरने पर बैठ गए। करीब दो घंटे तक रास्ता नहीं खुलने पर कांग्रेस के कुछ नेता पुलिस की निगरानी से बचते हुए जंगल के पथरीले रास्ते से लगभग डेढ़ किलोमीटर दूर दिवालीखाल पहुंच गए।

दूसरी ओर, आशीष नेगी के नेतृत्व में पहुंचे यूकेडी कार्यकर्ताओं को रोकने के लिए पुलिस ने वाटर कैनन का इस्तेमाल किया। इसके बावजूद कार्यकर्ता जंगल के रास्ते दिवालीखाल की ओर बढ़ गए। दोपहर करीब एक बजे दिवालीखाल में कांग्रेस, यूकेडी, प्रधान संगठन और सुराज सेवा दल के कार्यकर्ता एकत्र हुए। यहां प्रदर्शनकारियों ने सुरक्षा के लिए लगाए गए कई बैरियर तोड़ दिए। खबर के मुताबिक, 100 से अधिक प्रदर्शनकारी दो गेट पार कर विधानसभा की ओर बढ़ने में सफल रहे।

वाटर कैनन के बावजूद आगे बढ़े यूकेडी कार्यकर्ता

विधानसभा के मुख्य प्रवेश द्वार से कुछ दूरी पर स्थित दिवालीखाल में सुबह से ही पुलिस बल तैनात था। यूकेडी कार्यकर्ताओं ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए विधानसभा की ओर बढ़ने की कोशिश की, तो पुलिस ने उन्हें रोकने का प्रयास किया। इस दौरान दोनों पक्षों के बीच धक्का-मुक्की और तीखी नोकझोंक हुई।

प्रदर्शनकारियों ने पहली बैरिकेडिंग हटाने के बाद आगे लगे लोहे के गेट और कंटीले तारों से बने अवरोधों को भी तोड़ दिया। उन्हें रोकने के लिए पुलिस ने पानी की तेज बौछारें छोड़ीं, लेकिन प्रदर्शनकारी आगे बढ़ते रहे। इसके बाद सुरक्षा व्यवस्था पर दबाव बढ़ गया और बड़ी संख्या में कार्यकर्ता विधानसभा के मुख्य द्वार तक पहुंच गए।

मुख्य गेट पर पुलिस से टकराव, सैकड़ों कार्यकर्ता हिरासत में

यूकेडी के सैकड़ों कार्यकर्ता विधानसभा के मुख्य प्रवेश द्वार तक पहुंचकर सरकार विरोधी नारे लगाने लगे। प्रदर्शनकारी विधानसभा परिसर में प्रवेश की मांग पर अड़े रहे। यहां पुलिस और कार्यकर्ताओं के बीच करीब एक घंटे तक खींचतान और बहस होती रही।

स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया। इसके बाद उन्हें पुलिस वाहनों से मालसी स्थित अस्थायी जेल भेजा गया।

आशीष नेगी ने धामी सरकार पर लगाए भ्रष्टाचार के आरोप

उत्तराखंड क्रांति दल के युवा प्रकोष्ठ के केंद्रीय अध्यक्ष आशीष नेगी ने प्रदर्शन के दौरान मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश में भ्रष्टाचार बढ़ा है और विकास कार्य प्रभावित हुए हैं।

आशीष नेगी ने कहा कि यूकेडी की सरकार बनने पर भाजपा के कथित भ्रष्टाचार के मामलों में शामिल लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। उनके ये बयान राजनीतिक आरोप हैं।

पुलिस की कार्रवाई पर नाराजगी जताते हुए नेगी ने कहा कि लोकतांत्रिक तरीके से अपनी मांगें रखने वाली महिलाओं पर वाटर कैनन का इस्तेमाल करना शर्मनाक है। उन्होंने आरोप लगाया कि जंगलचट्टी और दिवालीखाल बैरियर पर महिलाओं के साथ अनुचित व्यवहार किया गया।

नेगी ने कहा कि गैरसैंण को पूर्ण स्थायी राजधानी घोषित किए जाने तक उनका आंदोलन जारी रहेगा। प्रदर्शन में प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों से आए यूकेडी के केंद्रीय पदाधिकारी, महिला मोर्चा की कार्यकर्ता, युवा और स्थानीय लोग शामिल हुए।

छह घंटे बैरियर पर फंसा रहा सगाई में जा रहा परिवार

प्रदर्शन के दौरान सुरक्षा व्यवस्था का असर आम लोगों की आवाजाही पर भी पड़ा। टैक्सी सेवाएं प्रभावित होने से कई ग्रामीणों को मेहलचौरी और गैरसैंण बाजार तक पहुंचने के लिए पांच से दस किलोमीटर तक पैदल चलना पड़ा।

इस बीच गोपेश्वर निवासी शिक्षक प्रकाश चंद्र कन्याल का परिवार भी परेशानी में फंस गया। परिवार तीन गाड़ियों में बेटे की सगाई के लिए देहरादून जा रहा था। आरोप है कि कालीमाटी बैरियर पर सुबह नौ बजे से दोपहर दो बजे तक परिवार को रोककर रखा गया और इस दौरान उन्हें खाने-पीने की दिक्कत हुई।

परिवार की ओर से रास्ता खोलने की मांग किए जाने के बावजूद शुरुआत में अनुमति नहीं मिली। बाद में कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल और मुकेश नेगी के हस्तक्षेप के बाद एक गाड़ी को आगे जाने दिया गया, जबकि दो गाड़ियां बैरियर पर ही रुकी रहीं। मौके पर मौजूद पुलिस अधिकारियों ने ऊपरी स्तर से मिले आदेशों का हवाला दिया।

स्थायी राजधानी और बुनियादी सुविधाओं को लेकर बढ़ा आक्रोश

विधानसभा सत्र के पहले दिन हुए इस प्रदर्शन ने गैरसैंण को स्थायी राजधानी बनाने की मांग को फिर चर्चा में ला दिया है। प्रदर्शनकारियों ने स्वास्थ्य सेवाओं, शिक्षा व्यवस्था और सड़कों की स्थिति में सुधार की मांग भी उठाई। सुरक्षा व्यवस्था और रास्तों पर सख्ती के कारण जहां प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच टकराव हुआ, वहीं आम लोगों को भी आवाजाही में परेशानी झेलनी पड़ी।