कठिनाइयों से जूझती मानसी को खेल विभाग पौड़ी में असिस्टेंट कोच की जिम्मेदारी दी गई
Summary
Spread the loveप्रयाग भारत, पौड़ी: उत्तराखंड की कठिन राहें, सीमित संसाधन और तमाम चुनौतियां भी उन युवाओं के हौसलों को नहीं रोक पातीं, जो अपने सपनों को सच करने की ठान लेते हैं. चमोली जिले के छोटे से गांव मजोठी की […]
More On prayagbharat
- Nari Shakti वंदन पर विवाद, कांग्रेस ने धामी सरकार को घेरा
- Dharali Aapda पर हरीश रावत का तीखा हमला, राहत में देरी पर उठाए सवाल
- Mahila Aarakshan बहस से पहले सड़क पर गन्ना, विधायक का अनोखा प्रदर्शन
- Mahila Aarakshan बहस के बीच विधानसभा गेट पर प्रदर्शन, गन्ना ट्रॉली पलटकर जताया विरोध
- Weather Alert : उत्तराखंड में 2 दिन भारी बारिश और तेज हवाओं की चेतावनी
प्रयाग भारत, पौड़ी: उत्तराखंड की कठिन राहें, सीमित संसाधन और तमाम चुनौतियां भी उन युवाओं के हौसलों को नहीं रोक पातीं, जो अपने सपनों को सच करने की ठान लेते हैं. चमोली जिले के छोटे से गांव मजोठी की बेटी मानसी नेगी इसका जीवंत उदाहरण हैं. कठिनाइयों से जूझती मानसी ने ऐसा मुकाम हासिल किया है, जो आज पूरे देश के युवाओं के लिए प्रेरणा है. मानसी नेगी को खेल विभाग पौड़ी में असिस्टेंट कोच की जिम्मेदारी दी गई है.
मानसी की शुरुआती पढ़ाई चमोली के साधारण स्कूलों में हुई. बचपन से ही पढ़ाई और खेल दोनों में अव्वल रहने वाली मानसी ने इंटरमीडिएट की पढ़ाई देहरादून से की. यहीं पढ़ाई के साथ उन्होंने खेलों की तैयारी भी शुरू की. इसी दौर में उनके पिता का साया उनके सिर से उठ गया. गम के इस भारी पल को उन्होंने कमजोरी नहीं, बल्कि अपनी सबसे बड़ी ताक़त बना लिया. आज मानसी नेगी खेल विभाग पौड़ी में असिस्टेंट कोच के पद पर कार्यरत हैं. यह जिम्मेदारी उन्हें प्रदेश सरकार की ओर से दी गई है. साथ ही वह यहां हाई एल्टीट्यूड रांसी स्टेडियम पौड़ी में भविष्य की प्रतियोगिताओं के लिए जी-जान से मेहनत कर रही हैं.उनकी कड़ी मेहनत और लगन का ही परिणाम है कि उन्हें तीलू रौतेली पुरस्का जैसे बड़े सम्मान से नवाज़ा जा चुका है. मानसी नेगी कहती हैं-
पहाड़ की पगडंडियां ही उनकी पहली प्रशिक्षण पाठशाला रही हैं. रोज़ाना स्कूल जाना और घर के काम संभालना ही उनके लिए फिटनेस का अभ्यास बन गया. यही कारण है कि आज वह कठिन ट्रैक पर भी आत्मविश्वास के साथ दौड़ती हैं. मानसी नेगी, एथलीट
मानसी नेगी की कहानी यह साबित करती है कि हिम्मत और मेहनत के सामने पहाड़ जैसी चुनौतियाँ भी छोटी पड़ जाती हैं. वह आज न सिर्फ उत्तराखंड बल्कि पूरे भारत की बेटियों के लिए प्रेरणा बन चुकी हैं. ईटीवी भारत से खास बातचीत में उत्तराखंड की गोल्डन गर्ल मानसी नेगी ने अपनी अब तक की यात्रा और भविष्य की तैयारियों को साझा की. मानसी ने बताया उनके खेल करियर में मां और भाई का सहयोग सबसे बड़ा संबल रहा है. वह अब तक 17 से अधिक पदक अपने नाम कर चुकी हैं.
मानसी का अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन 20 किमी वॉक रेस में 1 घंटा 36 मिनट का रहा है. उनके शानदार प्रदर्शन को देखते हुए उत्तराखंड सरकार ने उन्हें तीलू रौतेली पुरस्कार 2022-23 से सम्मानित किया. हाल ही में जर्मनी में आयोजित राइन रूहर FISU विश्व विश्वविद्यालय खेल 2025 में मानसी ने वॉक रेस टीम स्पर्धा में कांस्य पदक जीतकर देश और प्रदेश का नाम रोशन किया. मानसी इन दिनों पौड़ी के खेल विभाग में असिस्टेंट कोच के पद पर कार्यरत हैं. उन्होंने बताया यह नौकरी उन्हें प्रदेश सरकार की ओर से मिली है. रोजाना हाई एल्टीट्यूड रांसी मैदान में अभ्यास करती हूं, ताकि आने वाली राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में बेहतर प्रदर्शन कर सकूं. रांसी मैदान खिलाड़ियों के लिए बेहद उपयोगी साबित हो रहा है. यहां दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान और पंजाब जैसे राज्यों से भी खिलाड़ी अभ्यास करने पहुंचते हैं. पहाड़ के युवाओं को भी रांसी स्टेडियम की सुविधाओं का लाभ उठाना चाहिए. मानसी नेगी, एथलीट
प्रभारी जिला क्रीड़ा अधिकारी जयवीर रावत ने बताया पौड़ी का रांसी मैदान वर्तमान में विभिन्न राज्यों के 300 से अधिक खिलाड़ी अभ्यास और प्रशिक्षण के लिए उपयोग कर रहे हैं. उन्होंने कहा पहाड़ की बेटी मानसी नेगी ने कड़ी मेहनत कर उत्तराखंड और भारत का नाम रोशन किया है. प्रदेश सरकार ने मानसी की उपलब्धियों को देखते हुए उन्हें खेल विभाग पौड़ी में असिस्टेंट कोच के पद पर नियुक्त किया है. इसके साथ ही वह रांसी मैदान में आगामी प्रतियोगिताओं की तैयारी भी कर रही हैं. जयवीर रावत ने कहा कि रांसी मैदान पहाड़ के युवाओं के लिए अभ्यास और प्रशिक्षण का एक बेहद फायदेमंद स्थल है.
