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पार्टी प्रमुख विजय की रैली के दौरान भगदड़ के मामले में: पुलिस ने मथियाझागन को किया गिरफ्तार

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प्रयाग भारत, करूर : तमिलनाडु के करुर सिटी पुलिस ने पार्टी प्रमुख विजय की रैली के दौरान भगदड़ के मामले में तमिलगा वेट्री कजगम (टीवीके) के करूर पश्चिम जिला सचिव मथियाझागन को गिरफ्तार किया है. इस हादसे में 41 लोगों की जान चली गई थी.

न्यूज एजेंसी एएनआई की रिपोर्ट के अनुसार पुलिस ने करूर कस्बे के एक अन्य पदाधिकारी पौन राज को भी गिरफ्तार किया है. उसने रैली के लिए झंडों और फ्लेक्स बैनरों का इंतजाम किया था. एडीजीपी ने फोन पर बताया कि पौन राज को टीवीके पदाधिकारी मथियाझगन को पनाह देने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है.

चेन्नई पुलिस के अनुसार इस घटना के सिलसिले में एक यूट्यूबर और पत्रकार फेलिक्स गेराल्ड को भी गिरफ्तार किया गया है. यह घटना तब हुई जब करूर में विजय की रैली में भारी भीड़ कथित तौर पर अराजक हो गई. इससे भीड़ में दहशत फैल गई. कई लोग बेहोश हो गए, जिन्हें पास के अस्पतालों में ले जाया गया.

शनिवार को हुई दुखद भगदड़ में मरने वालों की संख्या बढ़कर 41 हो गई. इनमें 18 महिलाएं और 10 बच्चे शामिल हैं. केंद्रीय मंत्री निर्मला सीतारमण, केंद्रीय मंत्री एल मुरुगन और तमिलनाडु भाजपा प्रमुख नैनार नागेंथ्रन द्वारा पीड़ितों के परिवारों से मुलाकात के बाद एनडीए नेताओं का आठ सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल भगदड़ में जान गंवाने वाले हालात की जांच के लिए तमिलनाडु के करूर का दौरा करेगा.

भाजपा प्रमुख जेपी नड्डा ने प्रतिनिधिमंडल का गठन किया है. इसमें भाजपा सांसद अनुराग ठाकुर, सांसद तेजस्वी सूर्या और ब्रज लाल, अपराजिता सारंगी, रेखा शर्मा, शिवसेना के श्रीकांत शिंदे और तेलुगु देशम पार्टी (टीडीपी) से पुट्टा महेश कुमार शामिल हैं. समिति की संयोजक बीजेपी सांसद हेमा मालिनी हैं. नड्डा ने भगदड़ में मारे गए लोगों के परिजनों के प्रति अपनी गहरी संवेदना व्यक्त की और घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की.

इस बीच मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने घटना की जांच के लिए सेवानिवृत्त उच्च न्यायालय की न्यायाधीश अरुणा जगदीशन की अध्यक्षता में एक सदस्यीय आयोग का गठन किया. जहां निर्मला सीतारमण ने ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए बड़े सार्वजनिक समारोहों को प्रभावी ढंग से प्रबंधित करने के लिए एक मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) की वकालत की. वहीं एमके स्टालिन ने यह भी कहा कि राजनीतिक दलों और सार्वजनिक संगठनों को नियम बनाने चाहिए कि सार्वजनिक कार्यक्रमों को जिम्मेदारी से कैसे आयोजित किया जाना चाहिए.

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