Uttarakhand

देहरादून में सरकारी सुलभ शौचालय पर विवाद, कांग्रेस मुख्यालय से सटे निर्माण पर उठे सवाल

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प्रयाग भारत, देहरादून : देहरादून में कांग्रेस मुख्यालय से सटे एक सरकारी सुलभ शौचालय को लेकर नया विवाद सामने आया है। आरोप है कि आम जनता की सुविधा के लिए सरकारी धन से बनाए गए इस शौचालय का प्रवेश मार्ग बंद कर दिया गया है, जिससे आम लोग इसका उपयोग नहीं कर पा रहे हैं। मामले ने अब राजनीतिक रंग भी ले लिया है।

राजपुर रोड स्थित उत्तराखंड कांग्रेस मुख्यालय के पास मसूरी–देहरादून विकास प्राधिकरण (MDDA) द्वारा यह सार्वजनिक शौचालय बनाया गया था। यह इलाका राजधानी के सबसे व्यस्त व्यावसायिक क्षेत्रों में शामिल है, जहां प्रतिदिन बड़ी संख्या में लोगों की आवाजाही रहती है। ऐसे में इस सुविधा का उद्देश्य राहगीरों और आम नागरिकों को राहत देना था।

विवाद तब सामने आया जब शौचालय के मुख्य प्रवेश मार्ग के सामने दीवार बना दी गई। इससे आम लोगों की पहुंच पूरी तरह बंद हो गई। हालांकि शौचालय पर अब भी सरकारी बोर्ड लगा हुआ है, लेकिन बाहर से प्रवेश संभव नहीं है। आरोप है कि कांग्रेस भवन के भीतर से इस शौचालय का उपयोग पार्टी के नेता और कार्यकर्ता करते हैं।

इस मामले पर मसूरी–देहरादून विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी ने कहा कि उन्हें शौचालय बंद किए जाने की जानकारी नहीं थी। उन्होंने अधिकारियों से मौके की रिपोर्ट लेने और आवश्यक कार्रवाई के निर्देश देने की बात कही है।

वहीं कांग्रेस ने इन आरोपों को लेकर अपना पक्ष रखा है। पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता शीशपाल गुसाईं का कहना है कि शौचालय की साफ-सफाई और रखरखाव की व्यवस्था नहीं की गई थी। उनके अनुसार यह जिम्मेदारी नगर निगम और MDDA की थी, इसलिए पूरी जिम्मेदारी कांग्रेस पर नहीं डाली जा सकती।

हालांकि यह सवाल अब भी बना हुआ है कि शौचालय के सामने दीवार क्यों बनाई गई और आम जनता का प्रवेश किस आधार पर रोका गया। इस मुद्दे पर कांग्रेस की ओर से स्पष्ट जवाब सामने नहीं आया है।

उधर राजपुर विधानसभा क्षेत्र से विधायक एवं कैबिनेट मंत्री खजान दास ने कहा कि यदि किसी सार्वजनिक शौचालय को आम लोगों के लिए बंद किया गया है तो यह गलत है। उनका कहना है कि किसी भी राजनीतिक दल को सरकारी संसाधनों पर इस प्रकार नियंत्रण नहीं करना चाहिए, क्योंकि इससे सीधे जनता प्रभावित होती है।

फिलहाल मामला प्रशासन के संज्ञान में आ गया है और अब MDDA की जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि शौचालय बंद होने के पीछे वास्तविक कारण क्या हैं और आगे क्या कार्रवाई की जाएगी।

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