Rishikesh-कर्णप्रयाग रेल परियोजना ने पकड़ी रफ्तार, 125 KM का सफर अब सिर्फ 2 घंटे में होगा !
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प्रयाग भारत, ऋषिकेश : Rishikesh उत्तराखंड की बहुप्रतीक्षित ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना अब निर्माण के अहम चरण में पहुंच गई है। पहाड़ों के बीच बनाई जा रही सुरंगों का काम तेजी से आगे बढ़ रहा है। रेल विकास निगम लिमिटेड की निगरानी में परियोजना के अलग-अलग हिस्सों पर निर्माण कार्य एक साथ चल रहा है।
सुरंगों की खुदाई और लाइनिंग का काम समानांतर
परियोजना के चीफ प्रोजेक्ट मैनेजर सिविल हिमांशु बड़ोनी के अनुसार, काम निर्धारित समयसीमा के मुताबिक तेजी से आगे बढ़ रहा है। परियोजना को जल्द पूरा करने के लिए सुरंगों की खुदाई के साथ फाइनल लाइनिंग का काम भी समानांतर रूप से किया जा रहा है।
इसके अलावा ट्रैक बिछाने, इलेक्ट्रिकल सिस्टम, सिग्नलिंग और स्टेशन भवनों के निर्माण का काम भी अलग-अलग स्थानों पर साथ-साथ चल रहा है। अधिकारियों का लक्ष्य है कि निर्माण कार्य को तय समयसीमा के भीतर पूरा किया जाए।
125 किलोमीटर का सफर होगा आसान
ऋषिकेश से कर्णप्रयाग के बीच करीब 125 किलोमीटर लंबी रेल लाइन बनने के बाद पहाड़ों का सफर काफी आसान होने की उम्मीद है। वर्तमान में सड़क मार्ग से इस दूरी को तय करने में कई घंटे लगते हैं। रेल सेवा शुरू होने के बाद यह यात्रा करीब 2 घंटे में पूरी होने की उम्मीद जताई जा रही है।
रुद्रप्रयाग और कर्णप्रयाग समेत पहाड़ी क्षेत्रों तक पहुंच आसान होने से चारधाम यात्रियों को भी बड़ा फायदा मिलने की संभावना है। बदरीनाथ और केदारनाथ जाने वाले श्रद्धालुओं के लिए यात्रा समय और सड़क पर होने वाली लंबी यात्रा की थकान कम हो सकती है।
16 मुख्य और 13 एस्केप सुरंगें बन रहीं
इस महत्वाकांक्षी रेल परियोजना में कुल 16 मुख्य सुरंगों और 13 एस्केप सुरंगों का निर्माण किया जा रहा है। आपात स्थिति में यात्रियों की सुरक्षित निकासी के लिए एस्केप टनल को परियोजना की सुरक्षा व्यवस्था का अहम हिस्सा बनाया गया है।
सुरंगों के निर्माण के साथ ही ट्रैक, स्टेशन और अन्य रेलवे सिस्टम पर भी काम जारी है। निर्माण की गति बनाए रखने के लिए कई कार्यों को एक-दूसरे के समानांतर किया जा रहा है।
2028 तक ब्यासी सेक्शन में ट्रेन चलाने का लक्ष्य
परियोजना के तहत 2028 तक ब्यासी सेक्शन तक ट्रेनों का संचालन शुरू करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके बाद पूरी परियोजना को आगे बढ़ाकर उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों को आधुनिक रेल नेटवर्क से जोड़ने की दिशा में काम किया जाएगा।
पर्यटन और रोजगार को भी मिलेगा फायदा
ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना को केवल परिवहन के लिहाज से ही नहीं, बल्कि उत्तराखंड की अर्थव्यवस्था और पर्यटन के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
रेल कनेक्टिविटी बेहतर होने से चारधाम यात्रा के साथ-साथ पर्वतीय पर्यटन और साहसिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। इसके अलावा स्थानीय व्यापार, रोजगार और पहाड़ी क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियों को भी गति मिल सकती है।
चारधाम यात्रा के लिए अहम परियोजना
ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेलवे लाइन को उत्तराखंड की कनेक्टिविटी के लिए महत्वपूर्ण परियोजनाओं में शामिल किया गया है। परियोजना के पूरा होने के बाद ऋषिकेश से पर्वतीय क्षेत्रों तक पहुंच का एक नया विकल्प तैयार होगा।
योग नगरी ऋषिकेश रेलवे स्टेशन को भी इस रेल नेटवर्क से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण आधार के रूप में देखा जा रहा है। अब परियोजना के निर्माण कार्य की गति पर सभी की नजरें हैं और इसके पूरा होने से उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में रेल कनेक्टिविटी का नया अध्याय शुरू होने की उम्मीद है।