NEET UG फर्जी सर्टिफिकेट केस में एक और गिरफ्तारी, भोपाल से धीरज श्रीवास्तव पकड़ा गया; ₹5.58 लाख बरामद
प्रयाग भारत ,देहरादून :उत्तराखंड में NEET UGके जरिए MBBS दाखिले के लिए कथित फर्जी स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित प्रमाण पत्र तैयार कराने के मामले में एसआईटी ने एक और आरोपी को गिरफ्तार किया है। एसआईटी ने धीरज कुमार श्रीवास्तव को भोपाल से गिरफ्तार किया है। वह भोपाल में ‘एमबीबीएस वे’ नाम से ऑफिस चलाता था।
पुलिस के मुताबिक, आरोपी के कब्जे से 5 लाख 58 हजार 100 रुपये बरामद किए गए हैं। इस मामले में अब तक तीन आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है।
अलग-अलग कोर्स में कमीशन पर एडमिशन कराने का आरोप
एसआईटी के अनुसार, धीरज श्रीवास्तव अलग-अलग निजी विश्वविद्यालयों में MBBS, BTech, BCA, BBA और BCom जैसे कोर्स में कमीशन के आधार पर एडमिशन दिलाने का काम करता था।
पूछताछ में आरोपी ने कथित तौर पर बताया कि बरामद रकम उसे रूपेश पंडित ने फ्रीडम फाइटर कोटे के तहत कुछ छात्रों को MBBS में दाखिला दिलाने के एवज में कमीशन के तौर पर दी थी।
जांच एजेंसी के मुताबिक, धीरज ने रूपेश पंडित और अन्य साथियों के साथ मिलकर तीन अभ्यर्थियों के कथित कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित प्रमाण पत्र तैयार करवाए थे।
फर्जी दस्तावेजों से MBBS दाखिले का आरोप
मामला तब सामने आया जब उत्तराखंड के कुछ अभ्यर्थियों ने NEET UG MBBS दाखिले के दौरान स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित प्रमाण पत्र जमा किए। देहरादून निवासी प्रदीप बहुगुणा ने दस्तावेजों की जांच के दौरान कुछ प्रमाण पत्रों को लेकर सवाल उठाए।
जांच में सामने आया कि अलग-अलग क्षेत्रों से जुड़े कई अभ्यर्थियों के आवेदन में एक ही पता दर्ज था। इस आधार पर मामले में संदेह पैदा हुआ। बाद में कई दस्तावेजों के कथित तौर पर फर्जी होने की बात सामने आई।
प्रदीप बहुगुणा ने मामले की जांच के लिए जिलाधिकारी को पत्र 318(4), 338,लिखा। जांच के बाद 13 सितंबर को रायपुर और क्लेमेंटटाउन थानों में दो मुकदमे दर्ज किए गए। मुकदमों में बीएनएस की धारा 336(2), 340(2) और 61(2) के तहत कार्रवाई की गई।
एसएसपी ने गठित की थी SIT
मामले की गंभीरता को देखते हुए देहरादून एसएसपी प्रमेंद्र डोबाल ने एसपी देहात जया बलोनी के नेतृत्व में एसआईटी गठित की।
एसआईटी ने जांच के दौरान संबंधित अभ्यर्थियों के दस्तावेजों की पड़ताल की। पुलिस के मुताबिक, कई अभ्यर्थियों के दस्तावेजों में दर्ज पते गलत पाए गए। टीम ने संबंधित शिक्षण संस्थानों में जाकर मामले से जुड़े दस्तावेज कब्जे में लिए और अभ्यर्थियों के वास्तविक पतों की जानकारी जुटाई।
रूपेश और अरविंद पहले ही गिरफ्तार
इस मामले में पुलिस ने 21 सितंबर को रूपेश पंडित और अरविंद कुमार को गिरफ्तार किया था। पुलिस के मुताबिक, रूपेश की निशानदेही पर मेरठ स्थित उसके घर से कथित फर्जी प्रमाण पत्र बनवाने के एवज में ली गई 8 लाख रुपये की रकम बरामद की गई।