प्रभारी ईओ नियुक्ति पर उठे सवाल, चयन का आधार क्या ?
प्रयाग भारत, देहरादून :Uttarakhand के शहरी विकास विभाग में नगर निकायों के लिए की गई प्रभारी अधिशासी अधिकारी (ईओ) की नियुक्तियों को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। विभाग ने हाल ही में नौ नियमित ईओ को नगर निगमों में प्रभारी सहायक नगर आयुक्त की जिम्मेदारी दी, जबकि 18 क्लर्क, सफाई निरीक्षक, कर अधीक्षक और लेखा कर्मचारियों को नगर पालिकाओं व नगर पंचायतों में प्रभारी ईओ नियुक्त कर दिया।
इन नियुक्तियों के बाद चयन प्रक्रिया को लेकर पारदर्शिता पर सवाल उठ रहे हैं। कई कर्मचारियों और विभागीय सूत्रों का कहना है कि यदि वरिष्ठता को आधार बनाया गया है, तो कई ऐसे अधिकारी हैं जो वरिष्ठ होने के बावजूद अब भी अपने मूल पदों पर कार्यरत हैं। वहीं, कुछ नियुक्त कर्मचारियों की वरिष्ठता सूची में काफी नीचे रैंक होने के बावजूद उन्हें प्रभारी ईओ की जिम्मेदारी सौंप दी गई है।
आलोचकों का आरोप है कि नियुक्तियों में समान मानदंड अपनाने के बजाय ‘पिक एंड चूज’ की नीति अपनाई गई। इस संबंध में शहरी विकास विभाग के अपर सचिव एवं निदेशक विनोद गिरी गोस्वामी से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उनकी ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं मिली।
जानकारी के अनुसार, शहरी विकास निदेशालय के पास निकाय प्रशासनिक संवर्ग के 68 अधिकारी उपलब्ध हैं। इनमें से 15 से अधिक अधिकारियों को कोई नई जिम्मेदारी नहीं दी गई, जबकि अन्य संवर्गों के कर्मचारियों को प्रभारी ईओ बनाया गया। विभाग के कुछ अधिकारियों का मानना है कि आवश्यकता पड़ने पर एक नियमित ईओ को दो छोटे निकायों का अतिरिक्त प्रभार देकर भी व्यवस्था चलाई जा सकती थी।
फिलहाल इन नियुक्तियों को लेकर विभाग की चयन प्रक्रिया और पारदर्शिता पर लगातार सवाल उठ रहे हैं, जबकि आधिकारिक स्पष्टीकरण का इंतजार किया जा रहा है।