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Uttrakhand के साल जंगलों में होपलो का कहर, 3.96 लाख बीटल नष्ट; हजारों पेड़ों पर खतरा

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प्रयाग भारत, देहरादून : उत्तराखंड के साल के जंगलों में होपलो यानी साल बोरर बीटल का प्रकोप एक बार फिर वन विभाग के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। देहरादून और कालसी क्षेत्र के साल वनों में इस कीट के बढ़ते प्रकोप को देखते हुए वन विभाग ने व्यापक निगरानी और नियंत्रण अभियान शुरू किया है। अभियान के तहत अब तक करीब 3.96 लाख वयस्क होपलो बीटल पकड़े और नष्ट किए जा चुके हैं।

होपलो का वैज्ञानिक नाम Hoplocerambyx spinicornis है। इसका लार्वा साल के पेड़ों के तने और हृदयकाष्ठ को नुकसान पहुंचाता है। समय रहते नियंत्रण नहीं होने पर इसका प्रकोप तेजी से फैल सकता है और बड़ी संख्या में पेड़ों को नुकसान पहुंचने का खतरा रहता है।

कालसी में 1934-35 से दर्ज है होपलो का प्रकोप

वन विभाग के मुताबिक, उत्तराखंड के साल वनों में होपलो का प्रकोप कोई नई समस्या नहीं है। इसके प्रकोप का ऐतिहासिक रिकॉर्ड कई दशकों पुराना है।

कालसी क्षेत्र की स्वीकृत कार्ययोजना में साल 1934-35 से अलग-अलग समय पर होपलो के प्रकोप का उल्लेख मिलता है। इसके अलावा देहरादून में 1916 से 1924, तिमली में 1958 से 1960 और थानो में 1964-65 के दौरान भी इस कीट के प्रकोप दर्ज किए गए हैं।

उत्तराखंड के अलावा देश के अन्य साल वन क्षेत्रों में भी समय-समय पर साल बोरर के बड़े प्रकोप सामने आते रहे हैं। मध्य प्रदेश के मंडला और बालाघाट तथा वर्तमान छत्तीसगढ़ के बिलासपुर और राजनांदगांव क्षेत्रों में भी इसके प्रकोप का वैज्ञानिक साहित्य में उल्लेख मिलता है।

हजारों साल के पेड़ों पर मंडरा रहा खतरा

होपलो का लार्वा मुख्य रूप से साल के पेड़ के तने और अंदरूनी हिस्से को नुकसान पहुंचाता है। शुरुआती स्तर पर इसकी पहचान और नियंत्रण नहीं होने पर कीट का फैलाव बढ़ सकता है।

प्रभावित पेड़ों की पहचान, नियमित फील्ड मॉनिटरिंग, ट्रैप ट्री ऑपरेशन और वयस्क बीटल को पकड़कर नष्ट करना इसके नियंत्रण के प्रमुख उपायों में शामिल हैं। इसी रणनीति के तहत देहरादून और कालसी क्षेत्र में अभियान चलाया जा रहा है।

वन विभाग ने बनाई डेडिकेटेड टास्क फोर्स

प्रकोप की लगातार निगरानी और नियंत्रण अभियान की समीक्षा के लिए वन विभाग ने एक डेडिकेटेड टास्क फोर्स गठित की है। इसमें वन विभाग के अधिकारियों के साथ उत्तराखंड वन विकास निगम और देहरादून स्थित वन अनुसंधान संस्थान (FRI) के विशेषज्ञ शामिल हैं।

टास्क फोर्स प्रभावित क्षेत्रों में फील्ड मॉनिटरिंग कर रही है। साथ ही होपलो के नियंत्रण के लिए वैज्ञानिक और सिल्वीकल्चर उपायों पर भी विशेषज्ञों से सलाह ली जा रही है।

3.96 लाख होपलो बीटल किए गए नष्ट

वन विभाग के अनुसार, मौजूदा प्रकोप से निपटने के लिए भारत सरकार से प्राप्त आवश्यक अनुमतियों के अनुरूप नियंत्रण कार्रवाई की जा रही है। अभियान के दौरान अब तक करीब 3.96 लाख वयस्क होपलो बीटल पकड़े जा चुके हैं और उन्हें नष्ट किया गया है।

विभाग का फोकस केवल प्रभावित क्षेत्र में कीटों की संख्या कम करने तक सीमित नहीं है, बल्कि संभावित रूप से इसके दूसरे साल वन क्षेत्रों में फैलने की आशंका को रोकना भी है।

FRI की मदद से होगा प्रकोप के कारणों का अध्ययन

मौजूदा प्रकोप के पीछे की वजह, इसके प्रसार को प्रभावित करने वाले कारकों और भविष्य में प्रभावी नियंत्रण के तरीकों को समझने के लिए वन अनुसंधान संस्थान (FRI) के सहयोग से शोध परियोजना तैयार की जा रही है।

इस शोध का उद्देश्य वर्तमान प्रकोप से निपटने के साथ-साथ भविष्य में साल के जंगलों को होपलो जैसे कीटों से बचाने के लिए दीर्घकालीन वैज्ञानिक रणनीति तैयार करना है।

वैज्ञानिक प्रोटोकॉल के तहत हो रही कार्रवाई

फिलहाल वन विभाग के सामने दोहरी चुनौती है। एक ओर प्रभावित इलाकों में होपलो की संख्या को नियंत्रित करना है, वहीं दूसरी ओर इसके संभावित विस्तार को अन्य साल वन क्षेत्रों तक पहुंचने से रोकना है।

वन संरक्षक शिवालिक राजीव धीमान के मुताबिक, होपलो नियंत्रण को लेकर की जा रही पूरी कार्रवाई स्वीकृत कार्ययोजना, निर्धारित वैज्ञानिक प्रोटोकॉल और विशेषज्ञ संस्थानों की तकनीकी सलाह के अनुसार की जा रही है।

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