अनाथ बच्चे और बेसहारा महिलाओं को मिलेगा अपना घर
Summary
Spread the loveप्रयाग भारत, देहरादून: राज्य में एक नई पहल की शुरुआत हो रही है। इसके साकार होने के बाद अनाथ बच्चों और निराश्रित महिलाओं को आश्रय केंद्रों में अलग-थलग नहीं रहना पड़ेगा बल्कि वे एक ही छत के नीचे […]
More On prayagbharat
- Rishikesh मंडी समिति के टावर पर चढ़ा युवक, मांगें पूरी होने तक नीचे उतरने से किया इनकार; भ्रष्टाचार के लगाए आरोप
- NEET विवाद के बाद NTA के नए कार्यालय में CISF तैनात होगी, गोपनीय क्षेत्रों की बढ़ाई जाएगी सुरक्षा
- Vande Bharat एक्सप्रेस में मिले 4 लावारिस बैग, 42.7 किलो गांजा बरामद
- Dehradun पुलिस में बड़ा फेरबदल, 22 उपनिरीक्षक-अपर उपनिरीक्षक के तबादले
- Pithoragarh के दो पर्वतारोहियों ने लद्दाख की 3 ऊंची चोटियां कीं फतह
प्रयाग भारत, देहरादून: राज्य में एक नई पहल की शुरुआत हो रही है। इसके साकार होने के बाद अनाथ बच्चों और निराश्रित महिलाओं को आश्रय केंद्रों में अलग-थलग नहीं रहना पड़ेगा बल्कि वे एक ही छत के नीचे पारिवारिक माहौल में रह सकेंगे। इसके लिए विकास नगर में आलंबन गांव बसाने का प्रस्ताव है। इसको लेकर महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास विभाग के सचिव चंद्रेश यादव ने बीते मंगलवार को सचिव समिति की बैठक में प्रस्तुति दी। मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने योजना को हरी झंडी दी है।
ऐसी होगी आलंबन गांव की संरचना
इस खास गांव को विकासनगर में करीब छह एकड़ जमीन पर विकसित किया जाएगा। जहां 20 घर बनेंगे, हर घर में 16 सदस्य रहेंगे। प्रत्येक घर में छह से 12 साल के आठ बच्चे, 12 से 18 साल की चार किशोरियां और चार महिलाएं एक परिवार की तरह रहेंगी। इस गांव की कुल क्षमता लगभग 320 सदस्यों की होगी। पहले पांच घरों से शुरुआत होगी।
महिलाएं और किशोरियां बनेंगी आत्मनिर्भर
आलंबन गांव में रहने वाली किशोरियों और महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए कई तरह की व्यावसायिक गतिविधियां चलाई जाएंगी। उनके उत्पाद और सामग्री बिक्री के लिए आउटलेट सेंटर खोले जाएंगे। इसके अलावा खेती, बागवानी, डेयरी, मुर्गीपालन और मछली पालन जैसी गतिविधियों का प्रशिक्षण भी दिया जाएगा, ताकि वे स्थायी रूप से अपनी आजीविका कमा सकें।
अधिकारी और कर्मी भी साथ रहेंगे
आलंबन गांव के संचालन के लिए अधिकारी और कर्मियों के भी रहने की व्यवस्था होगी, ताकि 24 घंटे देखभाल सुनिश्चित हो सके। गांव में एक सोसाइटी बनेगी जो निर्माण से लेकर संचालन तक सारा काम देखेगी। गांव में बिजली के लिए सोलर पैनल लगेंगे। आने-जाने के लिए ई-वाहन की सुविधा मिलेगी।
आश्रय केंद्रों में निराश्रित बच्चों और महिलाओं का सर्वांगीण विकास नहीं हो पाता। इसी कमी को दूर करने के लिए आलंबन गांव की योजना तैयार की गई है। इस गांव में अनाथ, निराश्रित व परित्यक्त बच्चों के साथ-साथ दिव्यांग और संकटग्रस्त महिलाओं को भी रखा जाएगा। -चंद्रेश यादव, सचिव, महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास विभाग