Roorkee से रुद्रपुर तक दशहरे की खास तैयारी, मुस्लिम कारीगर बना रहे रावण के विशाल पुतले
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प्रयाग भारत , रुड़की : बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक विजयदशमी पर्व देशभर में धूमधाम से मनाया जा रहा है। उत्तराखंड में भी दशहरा उत्सव को लेकर तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। रुड़की, लक्सर और रुद्रपुर में रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के विशाल पुतलों का दहन किया जाएगा। इन आयोजनों की खास बात यह है कि रावण के पुतले बनाने की परंपरा को मुस्लिम कारीगर पीढ़ियों से आगे बढ़ा रहे हैं। उनकी मेहनत और हुनर सामाजिक सौहार्द तथा आपसी भाईचारे का संदेश दे रहे हैं।
हालांकि, बढ़ती महंगाई के बीच पुतले बनाने वाले कारीगरों के सामने मेहनताने और परिवार का खर्च चलाने की चुनौती भी बनी हुई है।
रुड़की में 70 फीट के रावण का होगा दहन
रुड़की के नेहरू स्टेडियम में दशहरा उत्सव की तैयारियां पिछले करीब एक महीने से चल रही थीं, जिन्हें अब अंतिम रूप दे दिया गया है। यहां शाम को 70 फीट ऊंचे रावण, 55 फीट ऊंचे कुंभकर्ण और 45 फीट ऊंचे मेघनाद के विशाल पुतलों का दहन किया जाएगा।
इन पुतलों को तैयार करने के लिए उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले के पुरकाजी कस्बे से मुस्लिम कारीगरों की टीम रुड़की पहुंची है। कारीगर पिछले एक महीने से दिन-रात मेहनत करके पुतलों को तैयार करने में जुटे हुए हैं।
कारीगर तनवीर के मुताबिक, उनका परिवार पिछले 20 से 25 वर्षों से पुतले बनाने का काम कर रहा है। यह कला उनके परिवार की परंपरा का हिस्सा है और इसी के जरिए उनकी आजीविका भी चलती है।
महंगाई बढ़ी, लेकिन मेहनताने में नहीं हुई पर्याप्त बढ़ोतरी
पुतले बनाने वाले कारीगरों के सामने बढ़ती महंगाई एक बड़ी चुनौती बनकर सामने आई है। तनवीर का कहना है कि समय के साथ पुतले बनाने में इस्तेमाल होने वाली सामग्री की कीमतें बढ़ गई हैं, लेकिन मेहनताने में उसी अनुपात में इजाफा नहीं हुआ है।
ऐसे में परिवार का खर्च चलाना मुश्किल हो जाता है। इसके बावजूद कारीगर अपनी पारंपरिक कला को बचाए रखने और रोजी-रोटी के लिए इस काम को जारी रखे हुए हैं।
दशहरा उत्सव की तैयारियों में जुटे इन कारीगरों की मेहनत यह भी दर्शाती है कि धार्मिक आयोजनों से जुड़ी कई परंपराएं विभिन्न समुदायों के लोगों के साझा योगदान से आगे बढ़ती हैं।
लक्सर में रावण और कुंभकर्ण के 51-51 फीट के पुतले
लक्सर में भी विजयदशमी पर्व को लेकर तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। सनातन धर्म सभा रामलीला कमेटी की ओर से रामलीला मैदान में रावण और कुंभकर्ण के 51-51 फीट ऊंचे पुतले तैयार किए गए हैं।
आयोजन के अनुसार, शाम को राम-रावण युद्ध के मंचन के बाद सात बजे दोनों पुतलों का दहन किया जाएगा। इसके बाद भव्य दशहरा मेले का आयोजन होगा।
सनातन धर्म सभा रामलीला कमेटी इस बार लक्सर में 89वीं रामलीला का आयोजन कर रही है। छह अक्टूबर को विधि-विधान और पूजा-अर्चना के साथ रामलीला की शुरुआत हुई थी। इस बार मथुरा-वृंदावन से आए कलाकार रामलीला का मंचन कर रहे हैं। कलाकारों ने आकर्षक झांकियों के माध्यम से भगवान राम के जीवन और उनके आदर्शों को प्रस्तुत किया है।
रुद्रपुर में 1957 से मुस्लिम परिवार बना रहा रावण के पुतले
रुद्रपुर में भी दशहरा पर्व को खास बनाने के लिए तैयारियां की गई हैं। शहर के राम पार्क में रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के विशाल पुतले तैयार किए गए हैं। इस बार 70 फीट ऊंचा रावण, 65 फीट ऊंचा कुंभकर्ण और 60 फीट ऊंचा मेघनाद का पुतला आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।
इन पुतलों को बनाने का काम रामपुर का एक मुस्लिम परिवार वर्ष 1957 से करता आ रहा है। परिवार की कई पीढ़ियां इस परंपरा को आगे बढ़ा रही हैं। कारीगर दिलशाद और उनके परिवार के लिए यह काम केवल रोजगार का साधन नहीं, बल्कि उनकी कला, मेहनत और साझा सांस्कृतिक विरासत का हिस्सा भी है।
रुद्रपुर में दशहरा आयोजन को सुरक्षित और व्यवस्थित तरीके से संपन्न कराने के लिए पुलिस प्रशासन और नगर निगम ने भी तैयारियां की हैं।
दशहरा उत्सव दे रहा सामाजिक सौहार्द का संदेश
रुड़की और रुद्रपुर में मुस्लिम कारीगरों द्वारा रावण के पुतले तैयार करना आपसी भाईचारे और साझा सांस्कृतिक परंपरा की एक मिसाल है। अलग-अलग समुदायों के लोग अपनी कला और मेहनत से धार्मिक आयोजनों को सफल बनाने में योगदान दे रहे हैं।
एक ओर जहां विशाल पुतले दशहरा उत्सव का प्रमुख आकर्षण हैं, वहीं दूसरी ओर इन्हें बनाने वाले कारीगरों की पीढ़ियों से चली आ रही परंपरा सामाजिक सौहार्द का संदेश दे रही है। महंगाई और सीमित मेहनताने की चुनौतियों के बावजूद इन कारीगरों का हुनर आज भी दशहरा पर्व की तैयारियों का अहम हिस्सा बना हुआ है।