Uttarakhand

Uttrakhand में 2027 चुनाव से पहले दलबदल तेज, रामशरण नौटियाल कांग्रेस में शामिल; यशपाल बेनाम का इस्तीफा

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प्रयाग भारत , देहरादून : Uttrakhand में वर्ष 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक गतिविधियां तेज होने लगी हैं। प्रदेश में नेताओं के दल बदलने का सिलसिला भी शुरू हो गया है। भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष रामशरण नौटियाल ने पार्टी छोड़कर कांग्रेस की सदस्यता ग्रहण कर ली है। वहीं, पौड़ी के पूर्व विधायक यशपाल बेनाम ने भाजपा की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। बेनाम के अगले राजनीतिक कदम को लेकर चर्चाएं तेज हैं, हालांकि उन्होंने अभी तक किसी दूसरी पार्टी में शामिल होने की आधिकारिक घोषणा नहीं की है।

चुनाव से पहले नेताओं के दल बदलने की घटनाओं ने भाजपा और कांग्रेस, दोनों के भीतर राजनीतिक चर्चाओं को बढ़ा दिया है। इस बीच, दोनों दलों के नेताओं के बयान भी सामने आ रहे हैं। जहां कांग्रेस इसे अपने संगठन के विस्तार से जोड़कर देख रही है, वहीं भाजपा नेता चुनाव से पहले होने वाले दल-बदल को राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं से जोड़ रहे हैं।

रामशरण नौटियाल ने थामा कांग्रेस का हाथ

रामशरण नौटियाल ने सोमवार, 19 अक्टूबर को नई दिल्ली स्थित कांग्रेस मुख्यालय में पार्टी की सदस्यता ग्रहण की। नौटियाल पहले भी कांग्रेस में रह चुके हैं। करीब 12 साल पहले उन्होंने कांग्रेस छोड़कर भाजपा का दामन थामा था। पिछले विधानसभा चुनाव में उन्होंने भाजपा के टिकट पर चकराता विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा था, लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा था।

अब कांग्रेस में उनकी वापसी को चकराता क्षेत्र में पार्टी की संगठनात्मक गतिविधियों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए नौटियाल की वापसी से क्षेत्र में कांग्रेस की राजनीतिक रणनीति और संगठन को लेकर चर्चाएं शुरू हो गई हैं।

यशपाल बेनाम ने भाजपा की प्राथमिक सदस्यता से दिया इस्तीफा

पौड़ी जिले की राजनीति में सक्रिय रहे पूर्व विधायक और पूर्व पालिकाध्यक्ष यशपाल बेनाम ने 18 अक्टूबर को भाजपा की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया। वह करीब आठ वर्षों से भाजपा में थे।

हालांकि, बेनाम ने अभी तक अपने अगले राजनीतिक कदम का खुलासा नहीं किया है। उनके कांग्रेस में शामिल होने की संभावना को लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं चल रही हैं, लेकिन इस संबंध में अभी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

बेनाम का अगला फैसला पौड़ी क्षेत्र की राजनीति में चर्चा का विषय बना हुआ है। वहीं, रामशरण नौटियाल के कांग्रेस में शामिल होने के बाद प्रदेश में आगामी चुनाव से पहले नेताओं की राजनीतिक गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है।

प्रीतम सिंह बोले- कांग्रेस में आने से संगठन को मिलेगी मजबूती

कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह ने रामशरण नौटियाल के पार्टी में शामिल होने को संगठन के लिए अहम बताया। उन्होंने कहा कि जब कोई नेता पार्टी में शामिल होता है तो इससे संगठन को मजबूती मिलती है।

प्रीतम सिंह के मुताबिक, रामशरण नौटियाल के भाजपा छोड़ने के बाद उनके कांग्रेस में आने की संभावना जताई जा रही थी। उन्होंने यह भी कहा कि यदि यशपाल बेनाम कांग्रेस में शामिल होते हैं, तो इससे पौड़ी क्षेत्र में पार्टी को मजबूती मिल सकती है।

प्रीतम सिंह ने दावा किया कि कई अन्य नेता भी कांग्रेस के संपर्क में हैं और आने वाले समय में पार्टी में शामिल हो सकते हैं।

सुबोध उनियाल ने दलबदल को राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं से जोड़ा

उत्तराखंड सरकार में कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल ने चुनाव से पहले नेताओं के दल बदलने की घटनाओं पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि चुनाव के समय नेताओं का एक पार्टी से दूसरी पार्टी में जाना कोई नई बात नहीं है।

उनियाल के अनुसार, कुछ नेताओं को पहले टिकट मिलने की उम्मीद होती है, लेकिन परिस्थितियां बदलने पर वे अपने राजनीतिक भविष्य को लेकर दूसरे विकल्प तलाशने लगते हैं। उन्होंने पिछले लोकसभा चुनाव का उल्लेख करते हुए कहा कि उस दौरान कांग्रेस के कई नेता भाजपा में शामिल हुए थे।

उन्होंने यह भी कहा कि दूसरी पार्टी से आने वाले नेताओं को नई पार्टी में अपने लिए जगह बनाने की कोशिश करनी पड़ती है। सुबोध उनियाल ने नेताओं के पार्टी बदलने की प्रक्रिया को उनकी राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं से जोड़कर अपनी बात रखी।

2027 के चुनाव से पहले बढ़ सकती है राजनीतिक हलचल

उत्तराखंड में विधानसभा चुनाव 2027 को देखते हुए भाजपा और कांग्रेस, दोनों के लिए संगठनात्मक समीकरण महत्वपूर्ण हो गए हैं। रामशरण नौटियाल की कांग्रेस में वापसी और यशपाल बेनाम के भाजपा से इस्तीफे ने प्रदेश की राजनीति में नई चर्चाओं को जन्म दिया है।

कांग्रेस जहां नए नेताओं के शामिल होने को संगठन विस्तार के अवसर के रूप में देख रही है, वहीं भाजपा की ओर से दलबदल को लेकर अलग नजरिया सामने आया है। आने वाले समय में टिकट की दावेदारी, संगठन के भीतर असंतोष और नेताओं की राजनीतिक प्राथमिकताओं को लेकर दोनों दलों में गतिविधियां तेज हो सकती हैं।

फिलहाल यशपाल बेनाम के अगले कदम पर सबकी नजरें टिकी हैं। उनके किसी राजनीतिक दल में शामिल होने की आधिकारिक घोषणा के बाद ही उनकी आगे की रणनीति स्पष्ट हो सकेगी।