Uttarakhand रोडवेज कर्मचारियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू, 500 से ज्यादा बसों के पहिए थमे; यात्री परेशान
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प्रयाग भारत , देहरादून : उत्तराखंड में रोडवेज बसों से सफर करने वाले यात्रियों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। उत्तराखंड परिवहन निगम के कर्मचारियों ने 30 अक्टूबर से प्रदेशभर में अनिश्चितकालीन कार्य बहिष्कार शुरू कर दिया है। तीन महीने से वेतन नहीं मिलने, समान काम-समान वेतन और नई बसों की खरीद समेत विभिन्न मांगों को लेकर उत्तरांचल रोडवेज कर्मचारी यूनियन ने यह आंदोलन शुरू किया है।
प्रदेश के 20 डिपो में चालक, परिचालक और अन्य कर्मचारी काम छोड़कर धरने पर बैठ गए हैं। देहरादून आईएसबीटी समेत कई डिपो में बसों का संचालन प्रभावित हुआ है। आंदोलन के चलते करीब 500 से 600 बसों के पहिए थम गए हैं। ऐसे में यात्रियों को अपने गंतव्य तक पहुंचने के लिए निजी वाहनों और अन्य परिवहन साधनों का सहारा लेना पड़ रहा है।
रोडवेज कर्मचारियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू
उत्तरांचल रोडवेज कर्मचारी यूनियन ने अपनी लंबित मांगों को लेकर 30 अक्टूबर से प्रदेशव्यापी कार्य बहिष्कार का ऐलान किया था। इसके तहत प्रदेश के सभी 20 डिपो में कर्मचारी अलग-अलग स्थानों पर धरना दे रहे हैं।
देहरादून आईएसबीटी पर भी सैकड़ों चालक, परिचालक और अन्य कर्मचारी हड़ताल पर बैठ गए हैं। कर्मचारियों ने परिवहन निगम और सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रखने की बात कही है।
देहरादून आईएसबीटी पर बसों के पहिए थमे, यात्री परेशान
हड़ताल का सबसे ज्यादा असर देहरादून आईएसबीटी पर देखने को मिल रहा है। सुबह से ही रोडवेज के चालक और परिचालक काम बंद कर धरने पर बैठ गए। लंबी दूरी की कई बसें डिपो में खड़ी हैं और यात्रियों को बसों का इंतजार करना पड़ रहा है।
बस सेवा प्रभावित होने के कारण यात्रियों को निजी वाहनों से सफर करना पड़ रहा है। यात्रियों का कहना है कि निजी वाहन चालक उनसे मनमाना किराया वसूल रहे हैं।
हरियाणा जाने वाले यात्री अरुण ने बताया कि वह पिछले दो घंटे से बस का इंतजार कर रहे हैं, लेकिन उन्हें बस नहीं मिल पा रही है।
वहीं, पंजाब जाने वाले यात्री ओम शर्मा ने बताया कि वह पिछले तीन घंटे से बस का इंतजार कर रहे हैं। बस डिपो में खड़ी है, लेकिन उसका संचालन नहीं हो रहा है। पूछताछ करने पर उन्हें हड़ताल की जानकारी मिली।
तीन महीने से नहीं मिला कर्मचारियों को वेतन
उत्तरांचल रोडवेज कर्मचारी यूनियन के महामंत्री अशोक चौधरी ने बताया कि कर्मचारियों को अगस्त, सितंबर और अक्टूबर महीने का वेतन नहीं मिला है। परिवहन निगम की आर्थिक स्थिति लगातार खराब हो रही है। उन्होंने इसके पीछे नई बसों की खरीद नहीं होने और निगम के अधिकृत रूटों पर निजी बसों को परमिट दिए जाने को प्रमुख वजह बताया।
अशोक चौधरी के मुताबिक, साल 2022 के बाद से परिवहन निगम की सालाना आय में करीब 25 प्रतिशत की गिरावट आई है। पहले निगम को प्रतिदिन लगभग दो करोड़ रुपये की आय होती थी, जो अब घटकर करीब डेढ़ करोड़ रुपये रह गई है।
उन्होंने कहा कि संविदा, विशेष श्रेणी और अन्य श्रेणियों में काम करने वाले करीब 3,500 कर्मचारियों को समान काम के बदले समान वेतन नहीं मिल रहा है। जबकि इस संबंध में हाईकोर्ट के आदेश भी हो चुके हैं।
रोडवेज कर्मचारियों की आठ प्रमुख मांगें
उत्तरांचल रोडवेज कर्मचारी यूनियन ने अपनी मांगों को लेकर आठ सूत्रीय एजेंडा रखा है।
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अगस्त, सितंबर और अक्टूबर महीने का तीन महीने का बकाया वेतन तत्काल जारी किया जाए।
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प्रत्येक महीने की 7 तारीख तक कर्मचारियों को वेतन का भुगतान सुनिश्चित किया जाए।
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संविदा, विशेष श्रेणी, एजेंसी और ठेका कर्मचारियों को समान काम-समान वेतन दिया जाए। नियमित होने तक प्रतिमाह 30,447 रुपये वेतन दिया जाए।
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हिमाचल रोडवेज की तर्ज पर निगम कर्मचारियों को राजकीय कोष से वेतन देने की व्यवस्था लागू की जाए।
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नियमित कर्मचारियों को राज्य कर्मचारियों की तरह 60 प्रतिशत महंगाई भत्ता और संविदा व विशेष श्रेणी के कर्मचारियों को एरियर सहित डीए दिया जाए।
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एजेंसी के माध्यम से कार्यरत चालक, परिचालक और अन्य कर्मचारियों को निगम कर्मचारी घोषित कर एजेंसी व्यवस्था समाप्त की जाए।
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डग्गामारी पर रोक लगाई जाए और अवैध रूप से संचालित निजी बसों के परमिट पर कार्रवाई की जाए।
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सेवानिवृत्त कर्मचारियों के बकाया भुगतान का जल्द निस्तारण किया जाए।
29 अक्टूबर को पांच घंटे चली वार्ता भी रही बेनतीजा
यूनियन के अनुसार, इससे पहले 23 अक्टूबर को कर्मचारियों ने एक दिवसीय आंदोलन किया था। इसके बाद 29 अक्टूबर को परिवहन निगम के अधिकारियों और कर्मचारी यूनियन के बीच करीब पांच घंटे तक वार्ता हुई, लेकिन कोई समाधान नहीं निकल पाया।
इसके बाद यूनियन ने 30 अक्टूबर से प्रदेश के सभी 20 डिपो में अनिश्चितकालीन कार्य बहिष्कार शुरू कर दिया।
500 से 600 बसों का संचालन प्रभावित
कर्मचारी यूनियन के मुताबिक, आंदोलन के कारण परिवहन निगम का करीब 50 प्रतिशत काम प्रभावित हुआ है। प्रदेश में रोजाना लगभग 1,000 बसों का संचालन होता है, जिनमें से 500 से 600 बसें हड़ताल के चलते खड़ी हो गई हैं।
यूनियन ने चेतावनी दी है कि यदि अगले दो दिनों तक आंदोलन जारी रहा तो परिवहन निगम की बस सेवाएं पूरी तरह ठप हो सकती हैं। हालांकि, पर्वतीय मार्गों पर संचालित होने वाली बसों को फिलहाल इस आंदोलन से अलग रखा गया है।
दीपावली का त्योहार नजदीक होने के बीच रोडवेज कर्मचारियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल से यात्रियों की परेशानी बढ़ गई है। अब देखना होगा कि सरकार और परिवहन निगम प्रबंधन कर्मचारियों की मांगों पर क्या फैसला लेते हैं।