दिल्ली-एनसीआर में महसूस किए गए भूकंप के झटके
Summary
Spread the loveप्रयाग भारत, नई दिल्ली: दिल्ली एनसीआर में सोमवार सुबह करीब 5:37 बजे भूकंप के झटके महसूस किए गए. रिक्टर स्केल पर भूकंप की तीव्रता 4.0 मापी गई. इसका केंद्र नई दिल्ली और गहराई 5 किलोमीटर थी. नेशनल सेंटर […]
More On prayagbharat
- देहरादून रोड पर इलेक्ट्रिक स्कूटी बनी आग का गोला, मची अफरा-तफरी
- रुड़की में भीषण सड़क हादसा : कंपनी की बस ने बाइक को मारी टक्कर, दो मजदूरों की मौत
- हरिद्वार में सूखी नदी बनी आफत, तेज बहाव में बहीं दो कारें ; पुलिस ने रेस्क्यू कर निकाला
- चकराता में दर्दनाक सड़क हादसा : अनियंत्रित कार पलटी, 24 वर्षीय युवक की मौत
- बदरीनाथ चढ़ावा हेराफेरी केस: मुख्य आरोपी प्रमोद नौटियाल 31 जुलाई तक पुलिस रिमांड पर, जांच तेज
प्रयाग भारत, नई दिल्ली: दिल्ली एनसीआर में सोमवार सुबह करीब 5:37 बजे भूकंप के झटके महसूस किए गए. रिक्टर स्केल पर भूकंप की तीव्रता 4.0 मापी गई. इसका केंद्र नई दिल्ली और गहराई 5 किलोमीटर थी. नेशनल सेंटर फॉर सिस्मोलॉजी के मुताबिक, सुबह 5:37 बजे भूकंप के तेज झटके महसूस किए गए. अचानक आए झटकों से लोग घबराकर अपने घरों से बाहर निकल आए. भूकंप से फिलहाल किसी तरह के जान-माल के नुकसान की खबर नहीं है. वहीं एनडीआर व अन्य एजेंसियां भी सतर्क हो गईं.
नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर एक वेंडर अनीश ने कहा, अचानक सब कुछ हिलने लगा और ग्राहक चिल्लाने लगे. वहीं नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर अपनी ट्रेन का इंतजार कर रहे एक यात्री ने कहा, हमें ऐसा लग रहा था मानो कोई ट्रेन यहां जमीन के अंदर दौड़ रही हो. सब कुछ हिल रहा था. एक अन्य व्यक्ति ने कहा, मैं वेटिंग लाउंज में था. सभी वहां से भाग गए. ऐसा लगा जैसे कोई पुल या कुछ और गिर गया हो.
6 से अधिक तीव्रता का भूकंप खतरनाक: विशेषज्ञों के अनुसार यदि दिल्ली-एनसीआर में 6.0 या इससे अधिक तीव्रता का भूकंप आता है तो नुकसानदायक साबित होगा. इस तीव्रता के भूकंप से दिल्ली में इमारतों को नुकसान पहुंच सकता है. 7.0 या उससे ज्यादा तीव्रता का भूकंप दिल्ली में बड़ी तबाही मचा सकता है. भूकंप के दौरान घनी आबादी, पुरानी इमारतें और अव्यवस्थित निर्माण इसे और जोखिमपूर्ण बनाते हैं. ऐसे में भूकंप-रोधी उपाय व जागरूकता बहुत जरूरी हैं.
क्यों आता है भूकंप: दरअसल, पृथ्वी की चार प्रमुख परतें हैं, जिसे इनर कोर, आउटर कोर, मेंटल और क्रस्ट कहा जाता है. पृथ्वी के नीचे मौजूद प्लेट्स घूमती रहती हैं, जिसके आपस में टकराने पर पृथ्वी की सतह के नीचे कंपन शुरू होता है. जब ये प्लेट्स अपनी जगह से खिसकती हैं तो भूकंप महसूस किया जाता है. जानकारी के अनुसार, भूकंप की तीव्रता अधिक होने पर इसके झटके दूर तक महसूस किए जाते हैं.